A Hindi Poem

कर परिश्रम, कर अथक तू
लक्ष्य जब तक न मिले
तू बढ़ निरंतर इस कदर की
भाग्य की भी न चले

तू आप अपनी प्रेरणा
तेरे हाथ तेरा भाग्य है
मिला यह जीवन तुझे
इतना बहुत सौभाग्य है


जीवन की है बिसात क्या
है आज ये और कल नहीं
कर्म कर, जब तक है दम
कर लक्ष्य को धूमिल नहीं


गिनी हुई सांसें मिली
तुझको, न इनको व्यर्थ कर
नियति झुके तेरे समक्ष
स्वयं को इतना समर्थ कर


जीवन क्षणिक, सपने नहीं
इनको तू और विस्तार दे
अविजित है तू, जब तक हैं ये
उठ भाग्य को ललकार दे.....

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